
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सीता पहाड़ी परिसर में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। स्वामीजी ने राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति के संरक्षण को एक-दूसरे का पूरक बताया।
कार्यक्रम में आदिवासी समाज के बच्चों को शिक्षा सामग्री वितरित की गई। महिलाओं को स्वावलंबन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।
अपने उद्बोधन में स्वामीजी ने कहा कि सच्ची स्वतंत्रता तब होगी जब समाज का अंतिम व्यक्ति शिक्षित और आत्मनिर्भर बनेगा।
भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामूहिक भोजन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। यह दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण के नए संकल्प का प्रतीक बना।