संस्था का परिचय
सीता पहाड़ी भगवान बिरसा मुंडा सेवा समिति, जनवा, शंकरगढ़ (प्रयागराज) स्थित एक सनातन मूल्यों पर आधारित सामाजिक एवं धार्मिक सेवा संस्था है।
हमारा दृष्टिकोण (Vision)
एक ऐसा आत्मनिर्भर, स्वस्थ एवं संस्कारित भारत निर्माण करना जहाँ सेवा, धर्म और नैतिकता सामाजिक जीवन का आधार हों।
हमारा मिशन (Mission)
- आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापना
- कैंसर उपचार केंद्र निर्माण
- गौशाला विस्तार
- वृद्धाश्रम की स्थापना
परम पूज्य स्वामी हरि नारायण दास जी महाराज सनातन धर्म, सेवा और संस्कार के सजीव प्रतीक हैं। उनका जीवन केवल साधना तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाने का सतत संकल्प है।
प्रयागराज की पावन धरती से उदित उनका आध्यात्मिक तेज आज जनवा, शंकरगढ़ एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा-प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
प्रारंभिक जीवन एवं वैराग्य
स्वामीजी का प्रारंभिक जीवन अत्यंत सरल एवं सात्विक वातावरण में व्यतीत हुआ। बचपन से ही उनमें भक्ति, तपस्या और धर्मग्रंथों के अध्ययन की गहरी रुचि थी।
सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने सन्यास मार्ग को अपनाया और स्वयं को पूर्णतः धर्म एवं समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
प्रेरणा स्त्रोत – भगवान बिरसा मुंडा
परम पूज्य स्वामी हरि नारायण दास जी महाराज भगवान बिरसा मुंडा के अदम्य साहस, धर्म रक्षा और समाज उत्थान के संकल्प से प्रेरित हैं।
उन्होंने सेवा, स्वाभिमान और सनातन मूल्यों के संरक्षण को अपने जीवन और मिशन का आधार बनाया है।
आध्यात्मिक साधना
- वेद, उपनिषद एवं गीता के गहन अध्येता
- नियमित जप, तप एवं ध्यान साधना
- धर्म सभाओं एवं सत्संगों के माध्यम से जन-जागरण
- सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास
सेवा दर्शन
स्वामीजी का मानना है कि जब तक समाज का कमजोर वर्ग सुरक्षित नहीं, तब तक धर्म की रक्षा अधूरी है।
इसी विचारधारा से प्रेरित होकर उन्होंने समाज सेवा को आध्यात्मिक साधना का अंग बनाया।
समाज सेवा कार्य
- आयुर्वेदिक चिकित्सालय निर्माण
- कैंसर अस्पताल स्थापना
- गौशाला संचालन एवं विस्तार
- सनातन वृद्ध सेवा आश्रम
- सामाजिक एवं ग्रामीण विकास कार्यक्रम
गौ-सेवा के प्रति समर्पण
स्वामीजी गौमाता को भारतीय संस्कृति का आधार मानते हैं। उनका विश्वास है कि गौ-सेवा राष्ट्र-सेवा के समान है।
इसी उद्देश्य से गौशाला की स्थापना की गई, जहाँ त्यक्त एवं घायल गौमाताओं की सेवा की जाती है।
समाज उत्थान के प्रति प्रतिबद्धता
स्वामीजी धार्मिक परिवर्तन (Conversion) के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु समाज को संगठित करने पर बल देते हैं।
व्यक्तित्व की विशेषताएँ
- अत्यंत सरल एवं विनम्र जीवनशैली
- सेवा-प्रधान नेतृत्व
- अनुशासन एवं तपस्या
- आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण व्यक्तित्व
- समाज को जोड़ने की अद्भुत क्षमता